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When Will I Get Married Print This Article Download as PDF
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  • Astrologer Peeyush Vashisth

कब होगा मेरा विवाह ? विवाह समस्या निवारण के आसान उपाय

When Will I get Married ? Easy Remedies For Marriage Problems


वर्तमान समय में विवाह विलम्ब एक प्रमुख समस्या है। मेरे पास जन्मपत्रिका परामर्श के लिए आने वाले या फोन से परामर्श लेने वाले अधिकांश लोगों की समस्या विवाह से जुडी हुई होती है। इनमें सभी प्रकार की समस्याएं होती हैं यथाः मेरा विवाह कब होगा ? जीवनसाथी का कार्यक्षेत्र, रंग रूप, स्वभाव इत्यादि कैसा रहेगा ? प्रेम विवाह होगा या अरेंज मेरिज? विवाह के बाद वैवाहिक जीवन कैसा रहेगा? इत्यादि । इस लेख में हम विवाह विलम्ब के कारणों और शीघ्र विवाह के लिए किये जाने वाले उपायों की चर्चा करेंगे।

विवाह विलम्ब कब होता है?


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक का विवाह 28 वर्ष की आयु तक नहीं हो, तो वह विवाह विलम्ब माना जाएगा। इसी प्रकार यदि किसी कन्या का विवाह 26-27 वर्ष की आयु तक नहीं हो तो उसे भी विवाह विलम्ब माना जाएगा। कई बार जब ग्रहयोग बहुत खराब होते हैं तो 32 वर्ष की आयु तक भी विवाह नहीं हो पाता है। यह अत्यधिक विवाह विलम्ब है और ऐसे में अपनी जन्मपत्रिका का ठीक प्रकार से विश्लेषण करवाकर बाधाकारक ग्रहों का उपाय करना बहुत आवश्यक होता है।

विवाह विलम्ब का ज्योतिषीय कारण

Astrological Reasons of Delay in Marriage

वर्तमान में सयुंक्त परिवार टूटने से लोग एक दूसरे को विवाह योग्य रिश्ते बताने में कतराते है । इससे उचित रिश्ता सामने नहीं आ पाता है और विवाह में विलम्ब होता है । इसके अतिरिक्त ज्योतिष के अनुसार  निम्नलिखित योगों में से कोई योग जन्मपत्रिका में बन रहा हो तो विवाह में विलम्ब होता हैः-

  • ज्योतिष में सप्तम भाव को विवाह का या जीवनसाथी का भाव माना जाता है। जब जन्मपत्रिका में सप्तम भाव मे राहु, शनि, या मंगल स्थित हों या इनकी दृष्टि हो तो विवाह में प्रायः विलम्ब होता है। 
  • सूर्य एवं केतु विवाह में विलम्ब तो नहीं करते लेकिन विवाह के बाद पारिवारिक समस्या बहुधा उत्पन्न कर देते हैं। विवाह के स्थान में सूर्य स्थित हो तो विवाह के बाद जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद उत्पन्न होते हैं। यदि सप्तम भाव में केतु स्थित हो, तो एक सगाई या विवाह सम्बन्ध तय होकर टूट सकता है।
  • इसके अतिरिक्त यदि सप्तम भाव में अष्टकवर्ग में कम रेखाएं हों या गुरू शुक्र नीच राशि में स्थित हों तो भी विवाह में विलम्ब हो जाता है।
  • यदि जन्मपत्रिका में शनि- सूर्य की युति बन रही है और दोनों के बीच आंशिक रूप से 10 डिग्री से कम का अन्तर है तो पितृदोष या कुल में किसी देवी देवता के दोष के कारण विवाह में विलम्ब होता है।

शीघ्र विवाह के लिए उपाय

Easy Remedies For early Marriage

यदि जन्पत्रिका में उपर्युक्त में से कोई योग बन रहा हो या अनावश्यक रूप से विवाह में विलम्ब हो रहा हो तो निम्नलिखित उपाय लाभकारी रहते हैंः-
1 जन्मपत्रिका में जो ग्रह विवाह में बाधाकारक है स्वयं उसके बीजमंत्र या वैदिक मंत्र के विधिवत जप करने चाहिए अथवा विधिवत करवाने चाहिए।
2 नित्य स्नान के जल में चुटकी भर हल्दी डाल कर स्नान करना चाहिए। 
3 संभव हो तो नित्य शिवमंदिर जाकर गणेश जी का दूर्वांकुर अर्पित करें, भगवान् शिव का जल में चन्दन और हल्दी मिलाकर अभिषेक करें और मां पार्वती और भगवान् शिव का मौली का कलावे से बंधन करें। इसके बाद वहीं बैठकर या घर आकर सीताजी के द्वारा की गई ‘‘ जै जै गिरिबर राज किशोरी .....‘‘ स्तुति का 1 या 3 बार पाठ करना चाहिए। 
4 यदि मंगलीक योग के कारण विवाह में विलम्ब हो रहा हो , तो नित्य मंगल चण्डिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
5 सामान्यतः कन्याओं के लिए गुरू ग्रह विवाह का कारण ग्रह होता है, अतः गुरूवार के दिन गाय को रोटी पर थोडा गुड और भीगी हुई चने की दाल रखकर खिलाने से भी बृहस्पति ग्रह अनुकूल होता है और विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
6 पुरुषों के विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए दुर्गा सप्तशती के निम्नलिखित मंत्र का नित्य जप करना बहुत लाभकारी है। इसमें नित्य 1 या 3 माला का जप मां दुर्गा के सम्मुख बैठकर करना चाहिए। नित्य लाल रंग का पुष्प और प्रसाद अर्पित करना चाहिए। यह उपाय 41 दिनों तक लगातार किया जाता है। इसके एक या दो अनुष्ठान में सामान्यतः विवाह अवश्य तय हो ही जाता है।

मंत्र-
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीं । तारिणीं दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम्।

7 यदि जन्मपत्रिका में गुरू ग्रह निर्बल हो तो 2 या 3 रत्ती वजन का सलोनी पुखराज अभिमंत्रित करके धारण करने से भी विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं।
8 जो ग्रह विवाहकारक है उसका अथवा सामान्य रूप से गौरीशंकर रूद्राक्ष धारण करने से भी प्रायः शीघ्र विवाह तय हो जाता है।

कब होगा मेरा विवाह

When Will I get Married...

  • ज्योतिष शास्त्र की सहायता से विवाह के सही समय का निर्धारण किया जा सकता हैं। कन्या की जन्मपत्रिका में बृहस्पति ग्रह विवाह का कारक होता है इसलिए सामान्यतः गुरू ग्रह की अन्तर्दशा या प्र्रत्यन्तर्दशा में कन्याओं का विवाह होता है। इसी प्रकार पुरुष जन्मपत्रिका में शुक्र ग्रह पत्नी कारक होता है शुक्र की अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर्दशा पुरुष जातकों के लिए विवाह कारक होती है।
  • जन्मपत्रिका के द्वादश भावों में सप्तम भाव विवाह को दर्शाता है, अतः सप्तमेश की अन्तर्दशा विवाह कारक होती है। इसी प्रकार सप्तम भाव में स्थित ग्रह भी विवाह समय पर अपना प्रभाव डालते हैं।  इस प्रकार इन सभी में जो षडबल में सर्वाधिक बली होता है, उसकी दशा अन्तर्दशा में विवाह होने की संभावना सर्वाधिक होती है।
  • वर्तमान में सयुंक्त परिवार टूटने से लोग एक दूसरे को विवाह योग्य रिश्ते बताने में कतराते है । इससे उचित रिश्ता सामने नहीं आ पाता है और विवाह में विलम्ब होता है । इसके अतिरिक्त ज्योतिष के अनुसार सप्तम भाव के पीड़ित होने , सप्तम भाव में सूर्य शनि , राहु या मंगल का अशुभ प्रभाव होने पर भी विवाह में समस्याओ का सामना करना पड़ता है । ऐसे में अनुभवी ज्योतिषाचार्य से अपनी जन्मपत्रिका का विश्लेषण करवाकर पीड़ाकारक ग्रहो का मंत्रजप , या कवच का पाठ करना चाहिए । कई बार एक छोटा सा उपाय भी बहुत बड़ा काम कर जाता है ।
 ( हमारे संस्थान में आचार्य पीयूष वशिष्ठ के द्वारा जन्मपत्रिका परामर्श प्रदान किया जाता है । इसमें आपको विवाह का समय, जीवनसाथी का रंग रूप स्वभाव,   जीवनसाथी के नाम का अक्षर, और ससुराल की दिशा इत्यादि के बारे में जन्मपत्रिका या प्रश्न कुंडली के माध्यम से बताया जाता है।   विवाह सम्बंधित परामर्श के लिए यहाँ क्लिक करे )
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