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20 VASTU TIPS FOR BUSINESS PLACE Print This Article Download as PDF
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  • Astrologer Peeyush Vashisth

What is Yatharth Geeta

 

 

वास्तुशास्त्र भारत के ऋषि मुनियो द्वारा प्रदत्त एक ऐसा विज्ञानं है जो पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु, आकाश इन पंचतत्वों के सही समायोजन से हमारे जीवन को सुखी और संपन्न बनाता है। वैसे तो घर के प्रत्येक कक्ष का अलग वास्तु होता है , लेकिन इस लेख में हम चर्चा करेंगे व्यवसाय स्थल के वास्तु की । यदि दुकान अथवा व्यवसाय स्थल का वास्तु सही है तो उस दुकान में निरंतर ग्राहकों का आना लगा ही रहता है और व्यापारी की आर्थिक उन्नति होती है। वहां व्यवसाय दिनों दिन फलता फूलता है, जबकि व्यवसाय स्थल में वास्तुदोष है तो वह निरंतर घाटा होता है।


यहाँ आचार्य पीयूष वशिष्ठ आपको व्यवसाय से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम बता रहे हैं :-

 

 

व्यापारस्थल का भूखंड आयताकार होना अच्छा माना गया है । यदि सिंहमुखी भूखंड है तो भी ठीक है, लेकिन गौमुखी या काकमुखी भूखंड को व्यवसाय हेतु अशुभ माना गया है।

दूकान या फैक्टरी का मुख्यद्वार उत्तर या पूर्व में होना अच्छा माना गया है। दक्षिणमुखी घर अच्छा नहीं होता लेकिन दुकान का दक्षिणमुखी होना ठीक है ।

 

मुख्यद्वार के सामने किसी प्रकार का वृक्ष, खम्बा, दूसरे भवन का कोना या अन्य किसी प्रकार का वेध होना ठीक नहीं होता है । यदि ऐसा हो तो मुख्यद्वार पर पाकुआ मिरर लगाये ।

Place Of Reception in Factory फैक्टरी में ईशान दिशा में सदेव मंदिर या जल का स्थान होना चाहिए । इसके अतिरिक्त मेहमानो या आगंतुकों से मिलने का कक्ष भी इसी दिशा में होना चाहिए ।

Owner Room in Business place- व्यवसाय के मालिक को दक्षिण-पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए और पीठ के पीछे दीवार होनी चाहिए।

कर्मचारियों का मुह काम करते समय उत्तर या पूर्व में हो तो अच्छा है ।इससे वे प्रसन्न होकर काम करते है ।

यदि आप चाहते है की आर्थिक रूप से किसी संकट का सामना आपको नहीं करना पड़े तो उत्तर पूर्व दिशा को सदैव स्वच्छ रखे और भूलकर भी इस दिशा में कभी शौचालय का निर्माण नहीं करे ।

लेखा सम्बन्धी कार्य और लेनदेन के हिसाब की फाइलें यदि उत्तर मध्य में रखी जाये तो अच्छा है ।

जो कर्मचारी अच्छा काम करते हो उन्हें कभी भी वायव्य कोण में नहीं बिठाये अन्यथा वे आपको छोड़कर कही दूसरी जगह जा सकते है ।

Meeting Room in Office - मीटिंग कक्ष यदि वायव्य कोण में हो तो सभी कर्मचारी एवं अधिकारी खुलकर अपनी राय प्रकट करते है और नवीन एवं प्रगतिदायक विचार सामने आते है। मीटिंग हॉल मध्य के भाग में भी बनाया जा सकता है ।

व्यवसाय की उन्नति के लिए उत्तर पूर्व दिशा में एक एक्वेरियम लगाना अच्छा होता है । इसमें 9 सुनहरी मछलिया और 1 काली मछली रखना अच्छा होता है ।

प्रत्येक कर्मचारी के लिए आप जो टेबल बनवाते है वह यदि आयताकार हो तो ज्यादा अच्छा होता है।

Place of electric equipment in office- बिजली से सम्बंधित उपकरण या मीटर आदि दक्षिण पूर्व में लगाना ठीक होता है। यदि कही उत्तर पूर्व में लगा दिए जाये तो दूकान में आग लगने का खतरा होता है।

Display counter in shop- दूकान का तैयार माल यदि उत्तर पश्चिम में रखा जाये या डिस्प्ले काउंटर इस दिशा में बनाया जाये तो बिक्री अधिक होती है ।

व्यवसाय स्थल में स्वागत कक्ष उत्तर पूर्व में , सुरक्षा गार्ड का कक्ष उत्तर पश्चिम में, लॉकर दक्षिण- पश्चिम में और सीढ़िया दक्षिण मध्य या दक्षिण पश्चिम में होना शुभ है ।

Vastu yantra for removing Vastudosh- यदि व्यापार स्थल में किसी प्रकार का वास्तुदोष रहा जाये और उसको दूर करना संभव नहीं हो तो वास्तुदोष नाशक यन्त्र की विधिवत स्थापना करनी चाहिए ।

यदि दुकान या फैक्ट्री में नुकसान बहुत होता हो या क़र्ज़ की स्थिति रहती हो तो पारद से निर्मित दिव्य लक्ष्मी प्रतिमा की स्थापना करनी चाहिए और श्रीसूक्त का पाठ करना चाहिए ।

कनकधारा स्तोत्र या गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ करने से भी धनलाभ बढ़ता जाता है

 

 


मेरे एक मित्र व्यापार से बहुत परेशान थे और मार्किट में उनका बहुत पैसा अटका हुआ था उस समय मैंने उन्हें
कनकधारा यन्त्र सिद्ध करवाया था और उसके बाद आश्चर्यजनक रूप से माँ लक्ष्मी की कृपा उन पर हुई लेकिन इसमें केवल यन्त्र से ही कुछ नहीं होता करवाने वाले में श्रद्धा भी बहुत होना जरुरी है

 

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